नई तकनीक के चलते हार्ट से जुड़ी बीमारियों का इलाज काफी सुरक्षित हो गया है : डॉ. गौरव महाजन

नई तकनीक के चलते हार्ट से जुड़ी बीमारियों का इलाज काफी सुरक्षित हो गया है : डॉ. गौरव महाजन

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मेरठ. मौजूदा वक्त में दिल से जुड़ी बीमारियों के केस काफी संख्या में आने लगे हैं. ऐसे में लोगों को अवेयर करने की बेहद जरूरत है ताकि वो अपने दिल की सेहत का ख्याल रख सकें और समय पर बेहतर इलाज पा सकें.दरअसल, दिल के जरिए शरीर के बाकी हिस्सों में जो ब्लड सर्कुलेट होता है वो एऑर्टिक वाल्व के माध्यम से जाता है. अगर इस वाल्व पर कुछ भी असर पड़ता है तो वाल्व के सिकुड़ जाने का खतरा रहता है. ब्लॉकेज होने का खतरा रहता है, जिसे हार्ट फंक्शनिंग प्रभावित होती है.कैसे ये सर्जरी पहले की तुलना में अब बेहद सुरक्षित हो गई है. मॉडर्न टेक्नॉलजी के चलते अब ऐसे बहुत कम केस रहते हैं जिनमें मरीज को ब्लड की जरूरत पड़ती है. साथ ही इससे मरीज को ज्यादा दिन अस्पताल में नहीं रहना पड़ता और तुरंत ही उनकी रिकवरी भी होने लगती है. इसी को ध्यान में रखते हुए में गाजियाबाद के वैशाली स्थित मैक्स सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल ने मेरठ में मरीजों के लिए एक अवेयरनेस कार्यक्रम आयोजित किया.इस कार्यक्रम में मैक्स सुपर स्पेशयलिटी अस्पताल वैशाली में कार्डियक सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. गौरव महाजन मौजूद रहे. साथ ही मेरठ शहर के वो तीन मरीज भी मौजूद रहे जिनकी मैक्स अस्पताल में सफल कार्डियक सर्जरी की गई. सर्जरी के बाद मेरठ के रहने वाले आरके शर्मा, संजय शर्मा और मुकेश भटनागर अब नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं. अवेयरनेस कार्यक्रम में डॉ. गौरव महाजन ने 38 वर्षीय संजय शर्मा का जिक्र करते हुए बताया कि नई तकनीक के चलते हार्ट से जुड़ी बीमारियों का इलाज काफी सुरक्षित हो गया है और सर्जरी मिनिमली इनवेसिव होती है यानी कम से कम चीर-काट की जरूरत पड़ती है.डॉ. गौरव महाजन ने संजय शर्मा के केस को विस्तार बताते हुए कहा, &https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8221;मरीज जब हमारे पास आए तो उन्हें महीनों से सांस की दिक्कत हो रही थी. उनकी एऑर्टिक वाल्व में समस्या थी. ये वाल्व बदलना बहुत ही आम बात है और सर्जरी करके इसे बदल दिया जाता है. हमने मरीज के केस को स्टडी किया और हाई रिस्क देखते हुए TAVR कराने का फैसला किया. TAVR यानी ट्रांस एऑर्टिक फेमोरल वाल्व रिप्लेसमेंट, जो मरीज के लिए बेस्ट ट्रीटमेंट जाता है. इसमें पैर की फेमोरल आर्टरी के जरिए वाल्व बदला जाता है. इस प्रक्रिया में न ही मरीज के सीने में कोई कट लगाया जाता और न ही हार्ट ओपन करने की जरूरत पड़ती है. हमने सफलतापूर्वक वाल्व बदल दिया. मरीज ने पूरा दिन आईसीयू में गुजारा और दूसरे ही दिन उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया. मरीज को न ही खून बहने की शिकायत हुई और न ही उनकी चेस्ट पर कोई बड़ा जख्म हुआ. कुछ ही दिनों में मरीज अपनी रोजमर्रा की जिंदगी सामान्य तौर पर गुजारने लगा.&https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8221; डॉ. गौरव महाजन ने कार्यक्रम में दूसरे मरीज का उदाहरण देते हुए बताया, &https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8221;आरके शर्मा को हार्ट अटैक के कारण सीने में दर्द हुआ था जिसके चलते उन्हें मैक्स में भर्ती कराया गया. यहां डॉक्टर्स ने उनकी पूरी तरह से जांच-पड़ताल की, जिससे पता चला कि उन्हें कोरोनरी आर्टरी डिसीज़ (CAD) है. उनकी तीनों ही आर्टरी में कम्प्लीट ब्लॉकेज था, जिस कारण उनके दिल का बड़ा हिस्सा इससे प्रभावित हो रहा था. उनका हार्ट बस 30 प्रतिशत ही काम कर रहा था, ऐसे में बायपास सर्जरी बहुत रिस्की थी. डॉक्टर्स की टीम बीटिंग हार्ट बायपास सर्जरी करने का फैसला किया. ये सर्जरी सफल रही और ऑपरेशन के 5वें दिन पेशंट को डिस्चार्ज कर दिया गया. यहां तक कि पेशंट को ब्लड चढ़ाने की जरूरत भी नहीं पड़ी और उनका हार्ट सुचारू रूप से काम करने लगा. आरके शर्मा की सर्जरी को 3 साल से ज्यादा गुजर गए हैं और आज वो एक बेहतर जीवन जी रहे हैं, हार्ट अटैक के डर के बिना अपने सब काम कर रहे हैं. सर्जरी के आरके शर्मा ने बहुत तेज रिकवरी की थी और वो महज 2-3 हफ्तों में ही अपने काम करने लगे थे.&https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8221;

इन दो मरीजों की सक्सेस स्टोरी शेयर करने के साथ ही डॉ. गौरव महाजन ने मेरठ के ही मुकेश भटनागर का केस भी लोगों के सामने रखा. मुकेश भटनागर की हालत ऐसी थी कि उनके लिए 500 मीटर चल पाना भी मुश्किल था. उनके सीने में बहुत ही गंभीर दर्द की शिकायत थी. जिसके चलते उन्हें बायपास सर्जरी के लिए कहा गया और उनकी सर्जरी भी सक्सेसफुल रही. आज यही मुकेश भटनागर 4 किलोमीटर तक वॉक कर लेते हैं और अपनी नॉर्मल लाइफ जी रहे हैं.

हार्ट अटैक एक ऐसी बीमारी है जिसके लिए ये माना जाता था कि ये ज्यादा उम्र के लोगों को होती है. क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ दिल भी कमजोर पड़ने लगता है. लेकिन अब हकीकत बदल गई है. मौजूदा वक्त में 20, 30, 40 साल की एज ग्रुप के युवा भी हार्ट से जुड़ी गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी वाले स्ट्रेस ने युवाओं के दिल भी कमजोर कर दिए हैं. यंग आबादी में दिल की बीमारियां अधिक स्ट्रेस लेने, लगातार घंटों तक काम करने और ठीक रुटीन में न सोने की वजह से हो रही हैं. साथ ही स्मोकिंग के कारण भी यंग पॉपुलेशन हार्ट डिसीज़ की चपेट में आ रही है. ऐसे में इस बीमारी के प्रति सचेत रहना जरूरी है, साथ ही इसके इलाज के बारे में भी. हार्ट के मामलों में वाल्व बदलने की सलाह दी जाती है क्योंकि वाल्व का इलाज संभव नहीं है. ऐसे में अगर किसी को वाल्व की समस्या है तो उन्हें बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए और समय पर सही इलाज कराना चाहिए.

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