सौतल झील में यदि मानकों से अधिक खोदाई हुई तो सन्त समाज करेगा आंदोलन:धर्मेन्द्र दास

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लखनऊ : राजधानी के अंतर्गत इटौंजा के ग्राम पंचायत अल्दमपुर, जलालपुर, उसरना, परसहिया, उनई,भडसर व किशुनपुर की लगभग 400 बीघा जमीन में फैली (समतल) सौतल झील को सारस पक्षी संरक्षण एवं संवर्द्धन केन्द्र के रूप में विकसित करने की प्रस्तावित योजना पर झील में मानकों से अधिक किये जा रहे खनन के चलते ग्रहण लगने वाला है।

यह झील प्रवासी पक्षियों के लिए लखनऊ जिले में अपनी तरह की अकेली झील मानी जाती है। पूरे साल में केवल बरसात में पानी से भरी रहने के कारण यह झील पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण का निर्माण करती है।सारस पक्षी संरक्षण एवं संवर्द्धन की दृष्टि से झील के विकास को लेकर किसी तरह की योजना पर अब तक किसी भी प्रकार का कोई काम नहीं हुआ है।

अब इस झील पर खनन माफियाओं की नजर गड़ जाने के कारण झील के अस्तित्व पर भी अब संकट खड़ा हो गया है।कुछ वर्ष पूर्व तक जाड़े के मौसम में नवंबर से फरवरी महीने तक विदेशी प्रवासी पक्षी इस झील में प्रवास के लिए पहुंचते थे।लेकिन विगत कुछ वर्षों से झील में खेती किये जाने के कारण झील से विदेशी पक्षियों ने अपना मुंह मोड़ लिया था।

और अब मौजूदा समय में खनन माफिया आउटर रिंग रोड के नाम पर खनन अनुज्ञा लेकर झील में मानक के विपरीत खोदाई कर उसके स्वरूप को बदल रहे हैं। नाथ संप्रदाय के पीठाधीश्वर धर्मेन्द्र दास ने बताया कि इस समतल (सौतल ) झील के पास हमारे संप्रदाय की लगभग 13 हेक्टेयर जमीन है।जो हम सभी साधु समाज द्वारा चंद्र आपदा प्रबंधन विश्वविद्यालय को दान देने का फैसला लिया गया है।

जिस पर विश्वविद्यालय का निर्माण किया जाएगा।उन्होंने यह भी बताया कि हमारी जमीन से लगी हुई झील की जो लगभग 400 बीघा जमीन है।वह सारस पक्षी संवर्द्धन एवं संरक्षण केन्द्र बनाये जाने के लिए प्रस्तावित है।लखनऊ की सबसे बड़ी इस झील में जल संचयन एवं सारस पक्षी संवर्द्धन एवं संरक्षण केन्द्र बनाये जाने को लेकर हम साधु संतों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी से कई बार बात भी कर चुके है।

उन्होंने आगे बताया कि इस झील पर विगत वर्षों हमने और तत्कालीन ब्लाक प्रमुख मोहित सिंह ने सारस पक्षी संवर्द्धन एवं संरक्षण केन्द्र बनाये जाने के उद्देश्य से अवैध कब्जे भी हटवाये थे।क्योंकि झील की यह जमीन सारस पक्षी के संवर्द्धन एवं संरक्षण के लिए प्रस्तावित है।उन्होंने कहा कि झील में खोदी जा रही मिट्टी की लूट की जा रही है।अगर झील में मानक से अधिक मिट्टी की खोदाई की गई तो साधु संत समाज शीघ्र ही आंदोलन करेगा।

उन्होंने यह बताया कि अभी गत 27 मार्च को खदरा में संत समाज की एक बैठक आहूत की गई थी।जिसमें निर्णय लिया गया है कि संप्रदाय की जमीन को चंद्र आपदा प्रबंधन विश्वविद्यालय को दान में दे दिया जाय जिससे उक्त जमीन पर शीध्र ही विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य शुरू हो सके।और साथ ही साथ सौतल झील पर भी सारस पक्षी संवर्द्धन एवं संरक्षण केन्द्र की स्थापना का कार्य भी शुरू किया जा सके।इन सभी कार्यों के लिए संत समाज शीघ्र ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात भी करेगा।जिससे शीघ्र योजनाओं को गति प्रदान की जा सके।

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