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शीशी पर रेमडेसिविर का स्टीकर लगाकर हो रही बिक्री

लखनऊ : बाजार में कोरोना काल में जरूरी समझी जा रही दवाओं के संकट की बात कही जा रही है। हालां विटामिन सी और जिंक  की दवा के ढेरों ब्रांड बाजार में हैं। ऐसे में सिर्फ एक दो के भरोसे न रहें। शहर के बड़े वेंडरों का कहना है कि रेमडेसिविर का संकट भी इस सप्ताह के अंत तक दूर हो जाएगा।  अमृत फार्मेसी ओल्ड ओपीडी, केजीएमयू इंचार्ज पिंकी गुप्ता बताती हैं कि विटामिन सी की दवा के सौ से 150 ब्रांड हैं, जिंकोविट भी कई ब्रांड में है। फार्मेसिस्ट इसके लिए अधिकृत होता है कि वह लिखी दवा न होने पर उसी कंपोनेंट व स्ट्रेंथ वाली दूसरे ब्रांड की दवा दे। दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष विनय शुक्ला कहते हैं कि दवाएं भरपूर हैं, किसी ब्रांड विशेष की दवा की कमी हो सकती है। इंडियन चेस्ट सोसाइटी के प्रेसीडेंट डॉ. सूर्यकांत कहते हैं कि कुछ ब्रांड ज्यादा प्रसिद्ध हो गए हैं, बस और कुछ नहीं। सिर्फ कंपोजिशन पर ध्यान दें और विटामिन सी 500 एमजी और जिंक 50 एमजी ही खाना है। कॉम्बिनेशन भी चलेगा।

बढ़ते संक्रमण के बीच रेमडेसिविर की कालाबाजारी और नकली बेचे जाने की चर्चा तेज हुई है। कुछ ने तो यहां तक कहा कि एंटीबायोटिक की शीशी पर स्टीकर लगाकर रेमडेसिविर बताकर बेची जा रही है। हालांकि, इसका कोई प्रमाण नहीं मिला। दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष का कहना है कि रेमडेसिविर जहां से लें रसीद और बिल पर कंपनी का नाम जरूर लिखवाएं। इस हफ्ते खुले बाजार में बिक्री शुरू होने से इसका संकट दूर हो जाएगा।

इंडियन चेस्ट सोसाइटी के प्रेसीडेंट डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि लोग जान बचाने के लिए रेमडेसिविर के पीछे भाग रहे हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह जान बचाने के काम नहीं आती है। अक्तूबर में एक ट्रायल हुआ था, उसमें पाया गया कि जिन्हें यह इंजेक्शन दिया गया, उसकी जान बचाई नहीं जा सकी। यहां तक कि डब्ल्यूएचओ ने भी इसे देने से मना किया। यह रामबाण नहीं है। समय पर रोग की पहचान, समय पर इलाज से सबकुछ ठीक होगा।

योगी मंत्रिमंडल का फैसला 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को मुफ्त वैक्सीनेशन की सौगात

लखनऊ : तेजी से बढ़ रहे कोविड-19 संक्रमण के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए कोविड टीकाकरण सुविधा के एलान के तत्काल बाद 18 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों का नि:शुल्क वैक्सीनेशन कराने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अपने संसाधनों से टीकाकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाएगी।

यह निर्णय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को संपन्न प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया। बैठक में मुख्यमंत्री व मंत्रिमंडल के सभी कैबिनेट मंत्री, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व राज्यमंत्री वर्चुअल तरीके से शामिल हुए। प्रदेश सरकार के 2021-22 के बजट में कोरोना वैक्सीनेशन के लिए 50 करोड़ रुपये का एक फंड बनाने का प्रावधान किया था। ‘अमर उजाला’ ने 19 फरवरी के अंक में ही मुफ्त वैक्सीनेशन की तैयारियों का खुलासा कर दिया था। मंगलवार को सरकार ने इस संबंध में निर्णय करते हुए मुफ्त वैक्सीनेशन की उम्र सीमा तय कर दी।

मुख्यमंत्री ने एक मई से 18 वर्ष से अधिक आयु वाले व्यक्तियों को कोविड टीकाकरण सुविधा देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रति आभार जताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि बेहतर कोविड प्रबंधन के साथ-साथ व्यापक टीकाकरण कार्य कोरोना को परास्त करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा। इसलिए प्रदेश सरकार ने 18 वर्ष से अधिक आयु वाले लोगों का नि:शुल्क वैक्सीनेशन कराने का निर्णय लिया है।

अखिलेश यादव ने कहा है  अपने कार्यकाल में जो सेवाएं हमने शुरू कीं वही काम आ रही हैं आज

लखनऊ : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा सरकार लगातार चार वर्षों से प्रदेश की जनता को धोखा देती आ रही है। सपा सरकार ने जिन सेवाओं को चालू किया था अब वही कोविड समय में काम आ रही हैअखिलेश ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों में तालमेल न होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। यह बदहाली सिर्फ शहरों में ही नहीं है, बल्कि गांवों की हालत तो और भी खराब है। गांवों के पीड़ितों की आवाज सुनने वाला कोई नहीं है।

वर्तमान सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान नहीं दिया। सपा ने मांग की थी कि चूंकि भाजपा सरकार नया अस्पताल तो बना नहीं सकी इसलिए कैंसर अस्पताल को चालू किया जाए। तब भाजपा सरकार ने नहीं सुनी। अब जब पानी सिर से ऊपर बहने लगा है तो हज हाउस सरोजनीनगर, अवध शिल्प ग्राम और कैंसर अस्पताल को कोविड सेंटर बनाया जा रहा है। इनका निर्माण समाजवादी सरकार में ही हुआ था। बदले की भावना से भाजपा ने समाजवादी सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं को बर्बाद किया, जबकि आज वही काम आ रही हैं। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली 108 व 102 एंबुलेंस सेवाएं तभी चालू की गई थीं। इनसे काम चलाने की अब भाजपा की मजबूरी है। कहा कि भाजपाइयों की प्राथमिकता सत्ता पाना और चुनाव जीतना भर रह गया है। भले ही उनकी रैलियों और सभाओं से कोरोना का विस्तार होता रहे। लोगों के जान की उन्हें परवाह नहीं।

लखनऊ में उमड़ा दिल्ली व मुंबई से आए प्रवासियों का रेला

लखनऊ : कोरोना से मुंबई में बिगड़े हालात व दिल्ली में लॉकडाउन से वहां रह रहे प्रवासी तेजी से पलायन कर रहे हैं। दोनों महानगरों से ट्रेनें खचाखच भरकर आ रही हैं। सोमवार आधी रात से तो लखनऊ में प्रवासियों का रेला उमड़ पड़ा। ट्रेनों से उतर कर बस पकड़ने के लिए प्रवासियों का हुजूम आलमबाग, चारबाग, कैसरबाग बस अड्डे आदि बस अड्डों पर उमड़ पड़ा। इतनी भीड़ है कि इन्हें गंतव्य तक भेजने में आलमबाग और चारबाग बस अड्डे पर तो बसें कम पड़ गईं। यहां प्लेटफार्म पर बसें आते ही लोग धक्का-मुक्की कर व खिड़की से इनमें सवार होते नजर आए। परिवहन निगम लखनऊ परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक बीके बोस ने बताया कि सोमवार रात 12 बजे से मंगलवार शाम छह बजे तक 18 घंटे में 30,000 से अधिक कामगारों को 1500 बसों से उनके गृह जनपद रवाना किया। इनमें सर्वाधिक कामगार आजमगढ़, गोरखपुर, सुल्तानपुर, बहराइच, गोंडा ,बलरामपुर, अयोध्या, अंबेडकरनगर आदि के थे। प्रवासियों की भीड़ से रेलवे स्टेशनों व बस अड्डों पर यात्रियों की तादाद चार गुना तक बढ़ गई है। दिल्ली में पूर्वांचल और बिहार के लिए सीधे साधन न मिलने पर वहां के यात्री भी लखनऊ पहुंच रहे हैं।

निजी वाहन मालिकों उठाया मजबूरी का फायदा

रोडवेज बसों में जगह न मिलने पर लोग प्राइवेट बस, टेंपो, ट्रैवलर, कार, ट्रक से भी रवाना होते रहे। चारबाग, कैसरबाग, आलमबाग, कमता, शहीद पथ, ट्रांसपोर्ट नगर, 12 बिरवा, पॉलीटेक्निक, चिनहट चौराहे पर सैकड़ों यात्री निजी वाहनों का प्रयोग करते दिखे। इसका निजी वाहन मालिकों ने खूब फायदा उठाया। लखनऊ से गोरखपुर तक के लिए 300 रुपये की जगह 600 से 800 रुपये तक किराया वसूला। पॉलीटेक्निक चौकी इंचार्ज कमलेश राय को इसकी जानकारी मिली तो चालक को फटकार लगाकर उचित किराए पर यात्रियों को संत कबीरनगर भेजवाया।

जिंदा रहे तो फिर काम मिल जाएगा

राजस्थान में एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करने वाले गोरखपुर के छोटे लाल को दिल्ली में लॉकडाउन की सूचना मिली तो सामान समेटकर घर की तरफ निकल लिए। साधन नहीं मिला तो कुछ दूर तक ट्रक से निकले। इसके बाद राजस्थान में ही हाईवे पर बस मिली जो लखनऊ के बाराबिरवा चौराहे पर उतार कर चली गई। इसके बाद वह आलमबाग बस अड्डा पहुंचे। यहां सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक उनको गोरखपुर के लिए कोई साधन नहीं मिला। उनके साथ आधा दर्जन अन्य लोग भी राजस्थान से आए हैं। सभी ने कहा कि संक्रमण से बचकर जिंदा रहे तो मेहनत मजदूरी कर परिवार चला लेंगे। इसी तरह संत कबीर नगर बृजेश दिल्ली में फर्नीचर पेंटिंग का काम करते थे। लॉकडाउन के बाद वह भी सामान समेट कर घर चल पड़े। वह भी आलमबाग बस अड्डे पर बस के इंतजार में बैठे रहे। उन्होंने बताया कि रोडवेज कर्मचारियों ने शाम छह बजे बस मिलने की बात की है। कुछ इसी तरह का नजारा कैसरबाग व कमता स्थित अवध बस अड्डे का रहा। यहां भी दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान से वाली बसों के यात्री साधन का इंतजार करते दिखे।

5 मुफ्त वैक्सीनेशन पर काम शुरू, स्वास्थ्य विभाग को कार्य योजना तैयार करने के निर्देश

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य विभाग को मुफ्त कोविड वैक्सीनेशन के लिए कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मंत्रिपरिषद के साथियों से विचार-विमर्श के दौरान टीकाकरण अभियान को व्यापक स्तर पर संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन सेंटर बढ़ाएं और लक्षित आयु वर्ग के लोगों का डाटा तैयार करें। वैक्सीन की डोज की आवश्यकता का आंकलन कर उत्पादकों से इसकी सुचारू आपूर्ति का प्रबंध करें।

उन्होंने टीके के लिए कोल्ड चेन सहित सुरक्षित स्टोरेज व ट्रांपोर्टेशन की भी व्यवस्था के निर्देश दिए। मंत्रिमंडल की बैठक में सीएम ने कहा कि सरकार कोरोना की इस लहर में भी जीवन और आजीविका, दोनों को बचाने के लक्ष्य के साथ काम कर रही है। उन्होंने सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार वाले जिलों में कोविड उपचार की स्थिति पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन का मार्गदर्शन करने को कहा।

उन्होंने स्वच्छता व सैनिटाइजेशन अभियान पर जोर देते हुए निगरानी समितियों की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका बताई। उन्होंने पब्लिक एड्रेस सिस्टम से ग्रामीण एवं शहरी इलाकों में जागरूक करने के निर्देश दिए। सीएम ने विश्वास जताया कि जनता को अफवाहों से बचाते हुए प्रदेश में पिछले वर्ष की तरह कोरोना के नियंत्रण में सफलता प्राप्त की जा सकेगी।

केवल पांच से दस रुपये में बैंक से बेचा जा रहा गोपनीय डाटा

लखनऊ : बैंक हो या अन्य सरकारी कार्यालय वहां जमा होने वाले आधार कार्ड या अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का रख-रखाव सही से नहीं किया जा रहा है। एक तय सीमा के बाद ऐसे दस्तावेजों को रद्दी में बेच दिया जाता हैं। वही कुछ बैंक कर्मी व अन्य लोग साइबर ठगों की मदद के लिए इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर तैयार डाटा साइबर जालसाजों को बेच रहे हैं। इसकी कीमत महज पांच से दस रुपये के बीच ही होती है। ठगी के इस कारोबार में थोक के भाव हजारों लोगों के डाटा एक झटके में बेचे जा रहे हैं। ऐसे गिरोह का एसटीएफ ने पर्दाफाश भी किया था जिसमें डाटा बेचने का काम एक महिला बैंककर्मी कर रही थी।

काफी समय से लोग साइबर जालसाजी से परेशान हैं। किसी के खाते से एटीएम क्लोनिंग कर रकम निकाली जा रही है तो किसी का पूरा डाटा ही हैक कर लिया जा रहा है। महत्वपूर्ण दस्तावेजों से छेड़छाड़ कर लोन भी कराए जा रहे हैं लेकिन इसकी जानकारी असली खातेदार को नहीं रहती है। इस तरह की ठगी बैंक के अंदर के कर्मचारियों की मिलीभगत से हो रही है। बैंक के कर्मचारी ही साइबर जालसाजों को डाटा मुहैया करा रहे हैं।

महिला बैंककर्मी को एसटीएफ ने दबोचा था

हाल ही में एसटीएफ की टीम ने साइबर जालसाजी के मामले में एक महिला को गिरफ्तार किया था जो एक निजी बैंक में काम करती थी। वह साइबर अपराधियों को डाटा मुहैया कराती थी या फिर डाटा बैंक के सर्वर से चोरी किया जाता था। एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, 9 फरवरी को दिल्ली के उत्तम नगर की निवासी शिल्पी नाम की महिला को गिरफ्तार किया गया था। उसके मोबाइल से 6,000 लोगों का डाटा भी मिला था। शिल्पी ने यह कुबूल किया था कि वह डाटा साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराती है। शिल्पी ने पुलिस को बताया था कि डाटा बेचने में मोटा मुनाफा होता है। प्रति व्यक्ति के डाटा के लिए दस रुपये तक मिलते हैं। पुलिस के मुताबिक, शिल्पी एक निजी बैंक में जुलाई 2020 तक थर्ड पार्टी वेंडर के साथ सेल्स एग्जीक्यूटिव के पद पर काम करती थी।

बैंककर्मी शिल्पी ने किया था चौंकाने वाला खुलासा

शिल्पी ने पुलिस के सामने कुबूल किया था कि वह बैंक सेल्स एक्जीक्यूटिव के पद पर काम करती थी। इस दौरान शिल्पी काल सेंटर में काम करने वाले सलमान से मिली थी। सलमान ने ही उसे डाटा खरीदने व बेचने में मुनाफा कमाने की बात कही थी। वह तीन रुपये में एक व्यक्ति का डाटा लेती थी और साइबर अपराधियों को 10 रुपये प्रति व्यक्ति के हिसाब से डाटा बेचती थी। एसटीएफ के डिप्टी एसपी दीपक कुमार सिंह के मुताबिक, ऐसे साइबर जालसाजों को डाटा उपलब्ध कराने वाले गिरोह की कुंडली खंगाली जा रही है। इसमें कुछ और बैंक कर्मियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। जल्दी ही ऐसे बैंक कर्मियों को गिरफ्तार किया जाएगा।

मेदांता और सहारा समेत पांच अस्पताल कोरोना इलाज के लिए आरक्षित

लखनऊ : जिला प्रशासन ने राजधानी में कोरोना के गंभीर रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पांच बड़े अस्पतालों को आरक्षित किया है। इनमें शहीद पथ स्थित मेदांता हॉस्पिटल, एलडीए कॉलोनी स्थित अपोलो मेडिक्स इंटरनेशनल लाइफ साइंसेज लिमिटेड के अलावा गोमती नगर स्थित सहारा हॉस्पिटल है। इसके अलावा केजीएमयू के शताब्दी हॉस्पिटल फेस वन व दो और एसजीपीजीआई के यकृत प्रत्यारोपण भवन को भी कोविड उपचार के लिए आरक्षित किया गया है। प्रभारी जिलाधिकारी डॉ. रोशन जैकब के अनुसार राजधानी में इस समय आईसीयू वाले बेडों की अधिक जरूरत है। इसी क्रम में लेवल 2 व लेवल 3 स्तर के बड़े अस्पतालों को आरक्षित किया जा रहा है। इन अस्पतालों की सुविधाएं मिलने से गंभीर रोगियों के इलाज में आ रही दिक्कत को दूर किया जा सकेगा।

इन अस्पतालों के भवन परिसर व उनमें उपलब्ध बेड, दवाओं व रसायन, उपकरण, मानव संसाधन, कमरों व फर्नीचर के अलावा बिजली जनरेटर, ऑक्सीजन प्लांट, पेयजल सुविधा आदि प्रबंधन सुविधाओं को आरक्षित करने के लिए कहा गया है।  सभी चिकित्सालयों के प्रबंध तंत्र व अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वह अपने भवन परिसर को कोरोना संक्रमितों के लिए ठीक करवाकर जल्द उन्हें व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को सूचना दें। प्रभारी जिलाधिकारी ने चेतावनी दी है कि इसमें ढिलाई बरतने पर कार्रवाई होगी।

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