लखनऊ में कोरोना मरीजों की संख्या पहुंची 618 कोरोना से यूपी में 15 दिन के अंदर 8 मरीज की हुई मौत

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लखनऊ : कोरोना फिर से बेकाबू हो रहा है। कोविड की दूसरी लहर की तरह लखनऊ एक बार फिर कोरोना का एपिसेंटर बनकर उभरा है यहां एक्टिव मरीजों की संख्या 618 एक्टिव पहुंच गई है। वहीं प्रयागराज के भी बेहद चिंताजनक है। यहां लगातार दूसरे दिन मंगलवार को एक संक्रमित की मौत हुई है। जून महीने में अब तक प्रयागराज में कोरोना से 4 मौतें हो चुकी है। वहीं प्रदेश भर में 15 दिन के भीतर 8 मौत हुई है।

दूसरी तरफ एक्सपर्ट भी अब बढ़ते संक्रमण से सचेत रहने की सलाह दे रहा है। KGMU के सेंटर ऑफ एडवांस रिसर्च के हेड डॉ. एके त्रिपाठी ने बताया कि शरीर में कोविड के विरुद्ध एंटीबॉडी में आई कमी के कारण इन्फेक्शन में तेजी आई है लोगों का मास्क और सैनिटाइटर का प्रयोग अभी करते रहने होगा।मंगलवार को सबसे ज्यादा गौतमबुद्ध नगर में आएं केस 24 घंटे में कोरोना के 487 नए मरीज मिले हैं इनमें सबसे ज्यादा गौतमबुद्धनगर में 125 और गाजियाबाद में 53 मामले रिपोर्ट हुए हैं। 98 मामले लखनऊ में आए हैं। इसके बाद से प्रदेश में एक्टिव केस की संख्या 2 हजार 935 हो गई है। इस बीच 376 लोग रिकवर भी हुए हैं।

लखनऊ में 4 महीने बाद आ रहे ताबड़तोड़ केस
कोरोना मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। सोमवार को 132 लोगों में वायरस की पुष्टि हुई है। रोजाना छह से सात हजार लोगों की जांच कराई जा रही है । लगातार मरीजों की संख्या में वृद्धि से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले 14 फरवरी 201 लोग पॉजिटिव पाए गए थे। जबकि 16 फरवरी को 124 लोगों में वायरस की पुष्टि हुई थी।

सबसे ज्यादा अलीगंज में 25 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। चिनहट में 22 लोग संक्रमित मिले हैं। आलमबाग में 18 लोगों में वायरस मिले हैं। सिल्वर जुबली इलाके में 16, कैंसरबाग 13, रेडक्रास 10 और इंदिरानगर में पांच लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

ये पांच इलाके अधिक संवेदनशील

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक संक्रमण के लिहाज से सबसे ज्यादा अलीगंज, चिनहट, महानगर, कैसरबाग, आशियाना इलाके संवेदनशील है। कोरोना की दूसरी और तीसरी लहर में इन्हीं इलाकों में वायरस का सबसे ज्यादा प्रकोप था। इस बार फिर सबसे ज्यादा संक्रमित इन्हीं इलाकों में मिल रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने संक्रमण प्रभावित इलाकों में लगातार जांच का अभियान चला रहा है। ताकि संक्रमण की समय पर पहचान की जा सके।

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