वे कभी मुझे शैतान बना देते हैं, तो कभी साईं बाबा, जैकी श्रॉफ ने लेखकों को लेकर रखी अपनी राय

हर कलाकार की काम करने की अपनी प्रक्रिया होती है

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मुंबई। हाल ही में सिद्धार्थ रॉय कपूर और संजना सांघी स्टारर फिल्म ‘राष्ट्र कवच ओम’ रिलीज हुई है। इस फिल्म में अभिनेता जैकी श्रॉफ भी अहम किरदार में नजर आ रहे हैं। फिल्म को लेकर जैकी ने अपनी अनुभव शेयर किया और अपने इतने सालों के बॉलीवुड के एक्सपीरियंस को लेकर भी बात की।

हर कलाकार की काम करने की अपनी प्रक्रिया होती है

‘राष्ट्र कवच ओम’ में नजर आए अभिनेता जैकी श्राफ कहते हैं कि वह निर्देशक के एक्टर हैं। बकौल जैकी, ‘सुभाष जी (सुभाष घई) और देव आनंद साहब मुझे इस इंडस्ट्री में लाए। मैंने उनसे यही सीखा कि अपने कप्तान की इज्जत करो। फिल्मों के कप्तान निर्देशक होते हैं। कलाकार को निर्देशक के कमांड में रहना चाहिए, न कि निर्देशक को एक्टर के। मैं अपने तकनीशियंस की बहुत इज्जत करता हूं।’

अलग-अलग किरदार निभाने को लेकर जैकी कहते हैं, ‘मेरे लिए लेखक कुछ न कुछ लिखते रहते हैं। उन्हें मुझमें अलग-अलग रूप दिखता है। वह कभी शैतान बना देते हैं, तो कभी साईं बाबा। हम कलाकार तो कोरा कागज की तरह सेट पर जाते हैं, जिस पर लिखने वाले इतने सारे लोग होते हैं। यही वजह है कि उनकी इज्जत करना पहले से सीख लिया है।’

हाल ही में जैकी श्राफ फिल्म ‘राष्ट्र कवच ओम’ में नजर आए। ओम शब्द की अहमियत बताते हुए वह कहते हैं, ‘ओम शब्द तो पूरी दुनिया का कवच है। बचपन में मेरे अंकल 15 मिनट का अलार्म लगाकर मुझे ओम का उच्चारण करने बैठा देते थे। इस शब्द का महत्व यह है कि मन शांत हो जाता है। दिनभर काम करते रहने के बाद मन को शांत करना भी जरूरी होता है।’

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