आजम खां की करीबी सपा की नगर पालिका गोण्डा चैयरमैन उजमा राशिद ने अधिशासी अधिकारी से सांठ गाँठ कर अनुसूचित जाति के सफाई मित्रों के पीएफ के करोड़ो रूपये का किया घोटाला

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लखनऊ :  रूपेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ निर्मल श्रीवास्तव (एडवोकेट) पूर्व अध्यक्ष नगरपालिका परिषद, गोण्डा ने समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खां की करीबी और वर्तमान नगर पालिका परिषद्  गोण्डा की अध्यक्षा  उज्मा राशिद पर सफाई कर्मियों के पीएफ को अवैध तरीके से कूट रचित खातों में ट्रान्सफर कर करोड़ों का घोटाला करने का गम्भीर आरोप लगाया है । उन्होंने बताया कि श्रीमती राशिद नगर पालिका परिषद्  गोण्डा के अध्यक्षा पद पर 12 दिसम्बर 2017 से कार्यरत हैं। उनके अध्यक्षा होने के बावजूद उन्होंने चेक बुक के अतिरिक्त किसी अन्य अभिलेख पर कभी हस्ताक्षर नहीं किया है। उनके इस कृत्य के चलते सफाई कर्मचारियों के पी.एफ. खाते की धनराशि में करोड़ो रूपये का घपला हो चुका है। लेकिन इसके पश्चात भी अध्यक्षा अथवा अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद गोण्डा के द्वारा उक्त घोटालों को छुपाने का प्रयास किया गया। यही नहीं शासन को आज तक इस सम्बन्ध में कोई जानकारी भी नहीं दी गयी थी कि नगर पालिका के सफाई कर्मियों के इलाहाबाद बैंक, कलेक्ट्रेट शाखा, गोण्डा के पीएफ खातों में बहुत बड़ी साजिश करते हुए करोड़ों का घोटाला वर्तमान अध्यक्षा व अधिशासी अधिकारी के कार्यकाल में हुआ है।

अध्यक्षा व अधिशासी अधिकारी ने स्वयं को बचाने के लिए नाम मात्र के लिए एक एफआईआर 955 / 2020  थाना कोतवाली नगर गोण्डा में दर्ज करा दी गई। इस एफआईआर में अपने कृत्य को छिपाने के उद्देश्य से एक लिपिक को आरोपी बना दिया गया, जबकि अध्यक्षा व अधिशासी अधिकारी को बचा लिया गया।

सफाई कर्मियों के पीएफ घोटाले को अंजाम देने के लिए के लिए पीएफ लिपिक के पद पर श्रीमती उज्मा राशिद ने साजिशन अपने चाचा मुशफिक को तैनाती दे दी। इस शख्स ने कूट रचित सूची के द्वारा सफाई कर्मियों के खाते में भेजी जाने वाली धनराशि को  कमरूद्दीन व उज्मा राशिद द्वारा बताये गये खातों में धनराशि जमा करवा दी।

वास्तव में  उज्मा राशिद के चाचा श्री मुशफिक, आज भी सफाई कर्मी के पद पर कार्यरत हैं। लेकिन उन्हें पीएफ लिपिक के पद पर व पटल पर कार्य करने की अनुमति अवैध तरीके से दे दी गई।  जबकि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा जारी विभिन्न शासनदेश में यह ताकीद किया गया है कि निम्न श्रेणी के कर्मचारी से उच्च कर्मचारी के पद सम्बन्धी कोई कार्य कदापि न लिया जाए।

इससे पूर्व विपिन प्रकाश श्रीवास्तव को बिल लिपिक, स्वास्थ्य लिपिक तथा पीएफ लिपिक के पद व पटल पर कार्य करने की अनुमति दी गई थी। उनके निलम्बन के पश्चात किसी भी पटल का समुचित पर्यवेक्षण व अंकेक्षण आज तक नही कराया गया, जबकि अध्यक्षा व अधिशासी अधिकारी को प्रत्येक वित्तीय वर्ष का अंकेक्षण कराया जाना आवाश्यक है। नगर पालिका परिषद, गोण्डा की अध्यक्षा व अधिशासी अधिकारी द्वारा अंकेक्षण के लिए सरकार द्वारा निर्धारित अंकेक्षण टीम को बुलाकर अंकेक्षण की कार्यवाही नहीं करायी गयी, जिसके कारण प्रत्येक वर्ष पीएफ घोटालों की रकम लगातार बढ़ती गई।

नगर पालिका परिषद, गोण्डा की अध्यक्षा व अधिशासी अधिकारी द्वारा पीएफ घोटाले में खुद को बचाने के लिए माननीय राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, उत्तर प्रदेश लखनऊ के समक्ष पीएफ घोटाले की धनराशि वसूलने के लिए दावा प्रस्तुत किया जिसमे इलाहाबाद बैंक, इण्डियन बैंक व स्टेट बैंक को ही विपक्षी पक्षकार बना दिया गया है।

माननीय आयोग के समक्ष दिनांक 17 जून 2021 को उक्त दावा प्रस्तुत किया गया है जिसमें वसूल की जाने वाली धनराशि 2 करोड़ 21 लाख 93 हजार 9 सौ 22 रूपया अंकित है, दावे में उक्त रकम कहीं अधिक होने की संभावना से इन्कार नहीं किया गया है। माननीय आयोग के समक्ष लंबित दावे  का मुकदमा नम्बर CC/08/2021 है तथा जिसमें अगली पेशी 10 अगस्त 2021 नियत है।

आयोग के समक्ष प्रस्तुत दावे में नगर पालिका परिषद की ओर से यह भी स्वीकार किया गया है कि सम्बन्धित सफाई कर्मी / पीएफ खाता धारक व नगर पालिका परिषद को बृहद स्तर पर घोटाले  के कारण आर्थिक क्षति हुई है।

माननीय आयोग के समक्ष नगर पालिका परिषद, गोण्डा की ओर से ही आर्थिक रकम की क्षति का खुलासा किया गया और रकम के कहीं अधिक होने की संभावना भी जताई गई है। हैरानी की बात यह है कि जनपद के किसी भी उच्च अधिकारी के समक्ष आज तक कितनी आर्थिक क्षति हुई है न तो इसका खुलासा किया गया है और न ही इसकी सूचना दी गयी।

नगर पालिका परिषद गोण्डा के विहित प्रधाधिकारी आयुक्त महोदय देवीपाटन मण्डल गोण्डा है। जिनके समक्ष विनोद कुमार श्रीवास्तव द्वारा पीएफ घोटाले  की जांच के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था, तीन सदस्यीय टीम द्वारा उक्त प्रार्थनापत्र की जांच की गई जिसमें उक्त जांच टीम द्वारा आयुक्त महोदय देवीपाटन मण्डल से यह अनुरोध / संस्तुति किया गया कि शिकायत के बिन्दु गम्भीर प्रकृति के है तथा धन के गबन व दुरुपयोग से सम्बन्धित है, जिन पर उच्च स्तरीय जांच कराया जाना उचित होगा।

अभी तक तीन सदस्यीय टीम द्वारा आयुक्त महोदय देवीपाटन मण्डल गोण्डा से किये गए अनुरोध के आधार पर आयुक्त महोदय देवीपाटन मण्डल द्वारा अग्रेतर उच्च स्तरीय जांच नहीं कराई गई है, यदि यह उच्च स्तरीय जांच हो जाती तो नगर पालिका परिषद की वर्तमान अध्यक्षा श्रीमती उज्मा राशिद व अधिशासी अधिकारी  विकास सेनजेल के सलाखों के पीछे होते।

यही नहीं, सफाई कर्मियों के पीएफ घोटाले से बचने के लिए नगर पालिका परिषद गोण्डा द्वारा फर्जी बैलेन्सशीट भी तैयार की गई, जिसमें रामपुर नगर पालिका की बैलेन्सशीट को बैलेशशीट को छेड़-छाड़ कर के नगर पालिका गोंडा की बैलेन्सशीट बना दी गई है, जिसमें C.A. अलग-अलग है, परन्तु दोनों के फोन नं. एक ही अंकित हैं। इसके अतिरिक्त नगरपालिका गोण्डा की बैलेन्सशीट के पहले पन्ने पर कौशल किशोर एण्ड एशोसिएट का हस्ताक्षर है और अन्य दो पन्नों पर संचित अग्रवाल एण्ड एशोसिएट के हस्ताक्षर हैं, जो दिखाता है कि अधिशासी अधिकारी श्री विकास सेनएवं नगर पालिका अध्यक्षा श्रीमती उज्मा राशिद की मिली भगत से फर्जी बैलेन्सशीट बनाकर नगरपालिका की सम्पत्ति आय व अन्य विवरण को साजिशन छिपा लिया गया है।

जिलधिकारी गोंडा के निर्देशों के बावजूद नगर पालिका परिषद गोण्डा में पीएफ घोटाले के सम्बन्ध में कार्यवाही नहीं की गयी और घोटाले पर पर्दा डालने का प्रयास जारी है।

सफाई कर्मचारियों के पीएफ  के लिए सम्बन्धित भेजे जाने वाले सैंकड़ों चेक पर श्रीमती उजमा राशिद बतौर अध्यक्षा व श्री विकास सेनबतौर अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद गोण्डा हस्ताक्षर करते थे। इसके बावजूद कभी भी पीएफ  से सम्बन्धित चेक की व चेक के साथ संलग्न लाभार्थियों की सूची की पावती कार्यालय के सम्बन्धित पटल पर उपलब्ध न होने की भली-भांति जानकारी होने के बावजूद निजी लाभ को प्राप्त करने के उद्देश्य से कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

अधिशासी अधिकारी नगरपालिका व अध्यक्षा नगरपालिका परिषद गोण्डा की सहमति से फर्जी तरीके से पीएफ के खाते में पैसा जमा करने के लिए मूल सफाई कर्मियों के स्थान पर फर्जी सफाई कर्मचारियों का नाम डाल दिया जाता था तथा सामान्यतः मूल सफाई कर्मचारियों के खाते में पीएफ  धनराशि 10,000/- रूपये भेजी जाती थी। फर्जी सफाईकर्मियों के खाते में 1 से 1.5 लाख रूपये प्रतिमाह भेजा जाता था और किसी ने भी पहली नजर में दिख रही गड़बड़ी को पकड़ा नही और घोटाले की रकम माह दर माह बढ़ाने में सहयोग करते रहे।नगरपालिका परिषद गोण्डा के 90% सफाईकर्मचारी अनूसूचित जाति के हैं। इसलिए पीएफ धनराशि के घोटाले के सम्बन्ध में SC / ST एक्ट के अर्न्तगत भी कार्यवाही की जानी चाहिए थी, परन्तु ऐसी कोई कार्यवाही आज तक नहीं हुई।

वर्तमान अध्यक्षा द्वारा दिनांक 1 जुलाई 2017 से लागू वस्तु एवं सेवाकर (GST) के अधिनियम के अर्न्तगत सूचीबद्ध सेवाओं पर किसी प्रकार की GST की वसूली नही की गई है। जिसके कारण इस मामले में बड़े पैमाने पर कर अपवन्चना भी हुई है और नगरपालिका का विकास अवरुद्ध हो गया है। 84 / 2 व 83 स्थित मोहल्ला पंतनगर को तीन बार कब्जे में लेने हेतु जिलाधिकारी गोण्डा को पत्र नगर पालिका की ओर से गया परन्तु कब्जा करने के स्थान पर वर्तमान नगर पालिका परिषद् गोण्डा अध्यक्षा श्री उज्मा राशिद व अधिशासी अधिकारी श्री विकास सेनद्वारा साजिशन नगर पालिका के सभासद व उसके समर्थक के नाम सरकारी जमीन का बैनामा करा दिया गया, जिसकी पूर्व में शिकायत अलग से की जा चुकी है।

उज्मा राशिद अपने पद का दुरूप्रयोग करते हुए मोहल्ला रकाबगंज स्थित भवन संख्या 55, 55/1, 55/2 शत्रु सम्पत्ति को जीर्णोद्वार के नाम पर भवन को नेस्ता नाबूत करते हुए सिकमी किरायेदार होने के बावजूद नगर मजिस्ट्रेट/विनियमित क्षेत्र से नये भवन के निर्माण हेतु नक्शा पास करा लिया जबकि R.O.B. ऐक्ट 1958 के अर्न्तगत केवल भवन स्वामी ही नवीन निर्माण हेतु मानचित्र स्वीकृति का आवेदन कर सकता है। पुराने भवन को ध्वस्त करके नया भवन अवैध रूप से बना लिया गया है और सरकारी मलवा भी गायब कर दिया जबकि उक्त मलबे को नीलाम कर उससे प्राप्त धनराशि को सरकारी खजाने में धनराशि जमा किया जाना चाहिए था। शत्रु सम्पत्ति के पुराने भवन के मलबे की कीमत लाखो रूपये से कम नही थी। जिसके कारण भारत सरकार के शत्रु सम्पत्ति को भारी आर्थिक क्षति हुई है।

रूपेश कुमार श्रीवास्तव उर्फ निर्मल श्रीवास्तव (एडवोकेट) पूर्व अध्यक्ष नगरपालिका परिषद, गोण्डा ने सरकार से मांग की है कि अधिशासी अधिकारी श्री विकास सेनपर विभागीय कार्यवाही करते हुए तथा नगर पालिका परिषद गोण्डा (उ0प्र0) के वर्तमान अध्यक्षा श्रीमती उज्मा राशिद के वित्तीय एवं प्रशासनिक प्रभार को अतिक्रमित कर बर्खास्त करने के सम्बन्ध में कार्यवाही तत्काल प्रारम्भ करते हुए प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए।

प्रकरण सम्बंधित समस्त अभिलेख एवं साक्ष्य संलग्नक

संलग्नक  1 F.I.R. कॉपी (भाजपा जिलाध्यक्ष के पत्र पर आयुक्त महोदय द्वारा आदेश के बाद दर्ज)

संलग्नक  2 जिलाधिकारी गोण्डा द्वारा जाँच हेतु गठित टीम आदेश

संलग्नक  3  पंतनगर स्थित सरकारी नजूल की जमीन का बैनामा |

संलग्नक 4 (i)  फर्जी बैलेंस सीट रामपुर के आधार पर   तैयार की गई गोण्डा नगर पालिका परिषद की बैलेंस शीट

संलग्नक 4 (ii) फर्जी बैलेस शीट कॉपी पेस्ट गोण्डा की रामपुर की बैलेंस शीट से।

संलग्नक  5 PF घोटाले के सन्दर्भ में स्वयं नगरपलिका द्वारा उपभोक्ता आयोग में दाखिल बाद।

संलग्नक 6 EO,ADM द्वारा नजूल की जमीन का प्रमाण ।

संलग्नक 7  PF घोटाले की जांच के लिए डीएम द्वारा ताला तोड़ने के आदेश।

संलग्नक 8  पूर्व चैयरमैन एवं वर्तमान चेयरमैन के आदेश पर धनराशि अपने लोगों के खाते में भेजना।

संलग्नक 9 मथुरा सांसद श्रीमती हेमा मालिनी जी के द्वारा प्रकरण की जांच हेतु माननीय नगर विकास मंत्री को दिये गए पत्र पर हुए आदेश की छायाप्रति ।

संलग्नक  10  मा. कृषि मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही जी द्वारा मा. नगर विकास मंत्री को जांच हेतु दिया गया प्रार्थना पत्र |

संलग्नक 11 शासनादेश नगर पालिका बैठक के नियमानुसार  वर्तमान अध्यक्ष के अलावा अन्य कोई आपेक्षित नहीं है। लेकिन उसका भी उल्लंघन किया गया वीडियो रिकार्डिंग संलग्न है।

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