जल संरक्षण अभियान का लहर का शुभारंभ वृक्षारोपण भी किया

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झांसी : बबीना विकास खण्ड के ग्राम लहर ठकुरपुरा में बुन्देलखंड जल संरक्षण समिति के तत्वाधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें 100 दिन श्रमदान एवं जल संरक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ सीमा पांडेय द्वारा किया गया। इस अवसर पर जल सहेली मीरा द्वारा जल संरक्षण के प्रति किए गए कार्यों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गयी।

कार्यक्रम में जल गीतों की प्रस्तुति रहिमन पानी राखिए बिन पानी सब सून पानी गए न ऊबरे मोती मानस चूँन के साथ हुई और पानी अमृत समान सवे देत प्राण दान पानी में कचरा ना डालियो पारंपरिक गीतों के माध्यम से लोगों को पानी के बारे में जानकारी दी गयी। इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ सीमा पाण्डेय द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ सीमा पांडेय ने कहा कि यह जल संरक्षण कार्यक्रम नहीं बल्कि महा जल संरक्षण अभियान का शुभारंभ है जिसका प्रमुख उद्देश्य तालाबों में हो रहे अतिक्रमण को मुक्त कराकर उनका पुनर्द्धार कराना है एवं जल संरक्षण से सम्बंधित सभी विभागों को एक साथ जोड़कर जल संरक्षण की एक कार्य योजना बनाकर युद्ध स्तर पर इसे शुरू करना है।

इस कार्यक्रम को एक सीमित समय तक नहीं अपितु निरंतर सक्रिय बनाया जाये। हम रहे या ना रहे लेकिन जल संरक्षण का कार्य हमेशा चलता रहे। आगामी महीनों में जल संरक्षण को बेहतर रूप से संरक्षित किया जायेगा, जिसके लिए ऐसे लोगों को पुरस्कृत भी किया जायेगा। जिनके द्वारा जल संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता निष्ठा भाव से सुनिश्चित की होगी।

उन्होने कहा कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज के लोगों को जोड़कर जल संरक्षण के कार्यों में गति लाना एवं सरकार और समाज के साथ मिलकर 100 दिन के महा श्रमदान कार्य को सफल बनाना है। संयुक्त विकास आयुक्त मिथलेश सचान ने कहा कि अभी तक हम लोग जल संरक्षण को लेकर कार्य कर रहे थे, सभी अपने अपने स्तर से कर रहे थे, लेकिन आज ठकुरपुरा गांव से सभी एक साथ मिलकर जल संरक्षण रचनाओं का समेकित करके सभी एकजुट होकर इस कार्य को करेंगे तो लाभदायक होगा।

सभी संरचनाओं के कार्यों को मनरेगा से जोड़ दिया जाए और इन संरचनाओं को चिन्हित करने के लिए कार्य में सफलता हासिल होगी। उन्होने कहा कि 100 दिन के अभियान को जोड़कर ग्राम प्रधान सचिवों के साथ मिलकर वृक्षारोपण का भी काम करवाना है, जिससे जलवायु परिवर्तन न हो।

संयुक्त निदेशक कृषि एसएस चौहान ने कहा कि झांसी में 1492 तालाब, जालौन में 1492 तालाब, ललितपुर में 746 तालाबों का डाटा इकट्ठा कर रहे हैं। उनको कैसे हम सुरक्षित करें इसके लिए कार्ययोजना बन रही है। साथ ही प्राचीन तकनीक को अपनाते हुए सभी किसान जैविक खेती करें और होने वाले लाभों से भी जुड़े।

उप निदेशक अर्थ एवं संख्या एसएन त्रिपाठी ने कहा कि सभी विभागों के साथ मिलकर जल संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता को सुनिश्चित करेंगे एवं जल को संरक्षित करने के लिए गाँवों में अलग अलग प्रकार के कार्य किये जायेंगे, इसके लिए 100 दिन श्रमदान के साथ सभी लोग अपना तन-मन लगाकर इसको सफल बनायें।

प्रो. कृष्णा गांधी द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों के बारे में बताया गया कि कैसे बुंदेली तालाबो चंदेली तालाबो का संरक्षण करना चाहिए। वर्षा के समय जो पानी नदी और नालों के माध्यम से समुद्र में चला जाता है। सभी छोटे छोटे नालों को नदियों के ऊपर चेकडैम बना कर पानी को रोका जा सकता है और ज्यादा से ज्यादा नालों को तालाबों में जोड़कर वर्षा का जल तालाबों में मिलाकर पानी को इकट्ठा किया जाए।

जिससे पानी तालाबों में रहे आज भी 01 वर्ष ना रहकर तालाबों में तीन-चार साल पानी की निरंतरता बनी रहे। इसको लेकर भी एक कार्ययोजना बननी चाहिए। जिला समन्वयक मनरेगा राम औतार सिंह ने कहा कि जल संरक्षण से संबंधित कार्यों को हम मनरेगा के अंतर्गत कर सकते हैं इसके बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।

परमार्थ समाज सेवी संस्थान के मुख्य समन्वयक संजय सिंह ने कहा कि पानी के प्रति लोगों को जागरूक कर पानी के किनारे नाव लगाकर तालाब को साफ किया जाएगा एवं जल संरचनाओ, छोटी-छोटी नदियों को चिन्हित किया जायेगा जिन्हें बचाने के साथ साथ जीर्णाेद्धार भी किया जायेगा। अभी तक 39 नदियों पर कार्ययोजना बन चुकी है, जिसमें 27 पर सर्वे हो चुका है।

साथ में अभी कनेरा नदी को जीवित किया गया है, हमारा उद्देश्य तालाब संरक्षण एवं जल संरचनाओ को जीवित रखने के लिए समाज को जोड़ना है। प्रधानमंत्री द्वारा भी जल संरक्षण को महत्व दिया जा रहा। कार्यक्रम में एसडीएम झांसी क्षितिज द्विवेदी, बीडीओ अमित प्रताप सिंह, जिला कृषि अधिकारी केके सिंह, पर्यटन अधिकारी कीर्ति सिंह, एडीओ बबीना डीपी सोनी, राजीव नायक, सहायक अभियंता लघु सिंचाई एवं ग्राम प्रधान सहित बड़ी संख्या में जल प्रहरी, जल सहेलियां एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

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