दो दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पीएम मोदी से अहम मुद्दों पर होगी चर्चा

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अहमदाबाद : ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन दो दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंच चुके हैं। उन्होंने गुरुवार सुबह 08:30 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पर लैंड किया। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल ने एयरपोर्ट पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री का स्वागत किया। यहां वह एक बुलडोजर बनाने वाली कंपनी का भी दौरा करेंगे। रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ जारी हमलों के बीच जॉनसन का यह दौरा अपने आप में काफी अहम हो जाता है। खासकर ऐसे समय जब अमेरिका, ब्रिटेन के साथ यूरोपीय देश भी भारत से रूस के साथ व्यापार न करने की मांग उठा रहे हैं।

ऐसे में जॉनसन के इस दौरे की अहमियत अपने आप बढ़ जाती है।रिपोर्ट के मुताबिक, जॉनसन इस दौरे में भारत को रूस से हथियार या तेल खरीद कम करने को लेकर किसी तरह का भाषण नहीं देंगे। हालांकि, वे मोदी सरकार को रूसी उत्पादों के विकल्पों को लेकर प्रस्ताव जरूर दे सकते हैं।

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बोरिस जॉनसन की भारत यात्रा के क्या मायने हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात में किन अहम मुद्दों को लेकर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा आखिर दोनों नेता किस तरह व्यापार समझौते से लेकर रूसी उत्पादों के विकल्प को लेकर अहम चर्चा कर सकते हैं।

बोरिस जॉनसन के प्रवक्ता के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच बातचीत का केंद्रीय मुद्दा मुक्त व्यापार समझौता होगा। इसके अलावा दोनों नेता हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर भी चर्चा करेंगे। बताया गया है कि मोदी और जॉनसन जलवायु परिवर्तन को लेकर भी समझौते पर पहुंच सकते हैं। शिक्षा-नौकरियों के अलावा निवेश को लेकर भी ब्रिटिश पीएम की तरफ से बड़ा एलान आ सकता है। रूस-यूक्रेन के युद्ध के बीच पश्चिमी देश लगातार भारत से अपील करते रहे हैं कि वह रूस से व्यापार संबंधों को तोड़े और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कार्रवाई की निंदा करे।

इसके अलावा हालांकि, भारत ने अब तक अपना स्थिर रुख बरकरार रखा है। भारत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि वह रूस से अपने सालों पुराने रिश्तों को यूरोप के गुस्से की वजह से दांव पर नहीं लगा सकता। मौजूदा समय में भारत की तीनों सेनाएं और हथियार उद्योग रूस पर 50-60 फीसदी तक निर्भर है। इसके अलावा तेल को लेकर भी भारत कुछ हद तक रूस पर निर्भर है। ऐसे में जॉनसन इन दोनों क्षेत्रों में रूस को भारत के साझेदार के तौर पर हटाने के लिए बातचीत कर सकता है।हालांकि, इस क्षेत्र में भी ब्रिटेन की मुसीबतें काफी ज्यादा हैं।

दरअसल, भारत सरकार पहले ही साफ कर चुका है कि वह आने वाले समय में किसी भी देश से आयात बढ़ाने के बजाय मेक इन इंडिया के तहत घरेलू उत्पादन पर ही जोर देगा। ऐसे में ब्रिटिश प्रधानमंत्री भारत को लुभाने के लिए साझा परियोजनाओं पर समझौता कर सकते हैं।

बोरिस जॉनसन और मोदी की मुलाकात का मुख्य मुद्दा सुरक्षा ही रहने वाला है। लेकिन ब्रिटिश प्रधानमंत्री रूस से व्यापार के मुद्दे पर भी जोर देने की कोशिश करेंगे। हालांकि, इस क्षेत्र में खुद ब्रिटेन ही मुसीबत में है। दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले तक रूस ही ब्रिटेन का सबसे बड़ा तेल सप्लायर था।

दर्जनों प्रतिबंधों के बावजूद यूरोप अब तक रूस का सबसे बड़े तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में जॉनसन की ओर से यह मांग कि भारत तेल के लिए रूस पर निर्भरता कम करे, इसका उल्टा असर भी हो सकता है। माना जा रहा है कि जॉनसन इस मुद्दे पर सतर्कता के साथ उठाएंगे।

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