लालू परिवार में घमासान

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पटना : राष्ट्रीय जनता दल के मुखिया और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार में दो भाइयों के बीच एक बार फिर से राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। दोनों भाइयों के बीच दो दिनों से पोस्टर वॉर चल रहा है। जानकारी के अनुसार एक दिन पहले यानी रविवार को पार्टी दफ्तर में लगे पोस्टर में तेजप्रताप की फोटो दिख रही थी लेकिन सोमवार को इसे हटाकर तेजस्वी की पोस्टर लगा दी गई। अब इस नए पोस्टर में लालू यादव, राबड़ी देवी की फोटो तो है लेकिन तेजप्रताप यादव गायब हैं।

बता दें कि बीते दो दिनों के भीतर पटना में स्थित पार्टी कार्यालय में जिस तरह की गतिविधि देखी गई उससे साफ नजर आ रहा है कि दोनों भाइयों के बीच राजनीतिक महत्वाकांक्षा की लड़ाई आगे बढ़ चली है। बीते दिन राजद दफ्तर में छात्र यूनिट से   एक कार्यक्रम हुआ, जिसमें तेज प्रताप यादव मुख्य अतिथि थे. इस दौरान पार्टी दफ्तर पर सिर्फ तेजप्रताप यादव के बड़े-बड़े पोस्टर दिखाई दिए और तेजस्वी यादव की तस्वीर गायब थी। लेकिन आज तेजप्रताप की तस्वीर गायब है और तेजस्वी की फोटो लगा दी गई है। बता दें कि बीते 11 जून को पार्टी के 25वें स्थापना दिवस के अवसर पर लगाए गए पोस्टरों से तेज प्रताप यादव की तस्वीर गायब थी। अब अटकलें लगाई जा रही हैं कि कहीं यह पोस्टर की आड़ में राजनीतिक बदला तो नहीं? जानकारी के मुताबिक तेज प्रताप पोस्टर में जगह न मिलने से खासे नाराज थे और यह नाराजगी मंच पर भी दिखी।

बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल एक बार फिर अंदरूनी कलह से जूझ रही है। पार्टी प्रमुख लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के बयानों से पार्टी के भीतर नेताओं में नाराजगी बढ़ रही है। वहीं, तेजस्वी यादव भी दूरियां बना रहे हैं। दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर मनमुटाव की खबरें आ रही हैं। इधर,  भाजपा ने पार्टी में  खटपट को लेकर राजद और तेज प्रताप पर चुटकी ली है। बिहार भाजपा ने नसीहत देते हुए कहा कि तेज प्रताप को कम से कम पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बना दिया जाए। बता दें कि 8 अगस्त को राजद के एक कार्यक्रम में तेज प्रताप यादव ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पर निशाना साधते हुए उन्हें हिटलर तक कह डाला था। तेज प्रताप ने कहा कि जगदानंद सिंह सब जगह जाकर हिटलर की तरह बोलते हैं। पार्टी कार्यालय का मेन गेट अध्यक्ष की मर्जी से खुलता और बंद होता है। पिताजी के समय दरवाजा हमेशा खुला रहता था, लेकिन उनके जाने के बाद बहुत लोगों ने मनमानी शुरू कर दी है। तेज प्रताप यहीं तक नहीं रुके। उन्होंने जगदानंद सिंह को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि कुर्सी किसी की बपौती नहीं है।

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