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निजी स्कूलों में फीस वृद्धि को लेकर सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक घमासान

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के निजी स्कूलों में मासिक फीस वसूली पर रोक लगाने के लिए दाखिल की गयी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ताओं ने शीर्ष अदालत से मांग की थी कि निजी स्कूलों को फीस वसूली से रोकने के लिए यूपी सरकार को शासनादेश जारी करने का निर्देश दिया जाए। शीर्ष अदालत अभिभावकों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में दोबारा अपील करने की सलाह दी है।
दरअसल फीस वसूली पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 जुलाई को सुनवाई करते हुए इस संबंध में कोई भी आदेश जारी करने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने 8 राज्यों के अभिभावकों की ओर से दाखिल याचिका यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि हर राज्य की स्थिति अलग-अलग है। इसलिए याचिकाकर्ताओं को अपने राज्यों में स्थित हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने निजी स्कूलों की फीस वसूली पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने यह कहते याचिका खारिज कर दी कि निजी स्कूल ऑनलाइन क्लास चला रहे हैं। स्टाफ भी रखे हुए हैं। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि स्कूल बंद हैं। हाई कोर्ट के इसी फैसले को याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। जिस पर आज सुनवाई करते हुए जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने याचिकर्ताओं को एक बार फिर से इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा है।
अभिभावकों की मांग
आप बता दें कि वैश्विक महामारी कोविड-19 के चलते इस बार मार्च के आखिरी सप्ताह से ही सभी स्कूल, काॅलेज बंद हैं। शैक्षिक सत्र 2020-21 पर भी अनिश्चिता के बादल मंडरा रहे हैं। फिलहाल स्कूलों में छुट्टी चल रही है और बच्चों को ऑनलाइन ही पढ़ाया जा रहा है। लाॅकडाउन के चलते लोगों की नौकरियां और व्यापार भी बुरी तरह से प्रभावित हैं। ऐसे हालात में अभिभावकों की मांग है कि निजी स्कूलों की भारी-भरकम फीस से राहत दिलाई जाए।
फीस वृद्धि के पक्ष में एसो. ऑफ प्राइवेट स्कूल यूपी
निजी स्कूलों में फीस वसूली को लेकर सड़क से सुप्रीम कोर्ट तक घमासान मचा हुआ है। एक तरफ अभिभावक अपनी माली हालत की दुहाई देकर निजी स्कूलों से रकम की गुजारिश कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर निजी स्कूल कोई रियायत करने के मूड में नहीं है। उनके अपने तर्क हैं। 1 जून को उत्तर प्रदेश स्कूल ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने फीस बढ़ाने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया था। जिस पर एसो. ने सरकार को नोटिस भी भेजा था। एसो. ने मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन स्कूलों की फीस बढ़ाने की छूट देने और प्राइवेट स्कूल एक्ट खत्म करने की मांग की है।
किसी भी सूरत में नहीं बढ़ाने देंगे फीस: डिप्टी सीएम
फीस वसूली को लेकर यूपी सरकार भी अभिभावकों के पक्ष में है। उप मुख्यमंत्री डाॅ. दिनेश शर्मा कह चुके हैं कि प्रदेश में किसी तरह की फीस नहीं बढ़ने दी जाएगी। यदि वह सुप्रीम कोर्ट जा रहे हैं तो सरकार वहां तक लड़ेगी। यदि निजी स्कूलों ने जबरदस्ती की तो उनके पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
कई संगठन भी फीस माफी के लिए सक्रिय
निजी स्कूलों की फीस माफी को लेकर कई सामाजिक संगठन भी सक्रिय हैं। राष्टीय अभिभावक मंच सरीखे कई संगठन पिछले दो महीने से स्कूलों प्रबंधकों को फीस माफी के लिए जागरूक कर रहे हैं। कई स्कूलों ने अपने यहां दो महीने की फीस माफी की भी है। हालांकि अब यह पूरा सत्र ही जैसे-तैसे चलने जा रहा है। ऐसे में अभिभावकों की मांग है कि निजी स्कूल फीस में भारी राहत या पूरी छूट दें।

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