सच्चे शीया बनना चाहते हो तो हारूने मक्की जैसा किरदार बनाओ: मौलाना इब्ने

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बाराबंकी :  शिया सुन्नी की एकता मिसाल पेश करने वाले पीर मोहम्मद (पीरु) के इंतकाल से जनपद में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। उनके जनाजे में सभी धर्मों के लोग शामिल थे। वहीं वक्फ बड़ेल कर्बला में स्व. पीर मोहम्मद की मजलिस आयोजित की गयी। जिसमें मजलिस को मौलाना इब्ने अब्बास ने सम्बोधित करते हुए कहा कि  दिल में मवद्दते अहलेबैत पीरू के ऐसी समाई कि माले दुनियां समाज और औलाद कोई न रोक पाई। जिसके दिल में इश्के अहलेबैत समा जाती है उसको दौलते दुनियां हैच नजर आती है।

 

मौलाना ने आगे कहा कि मवद्दते अहलेबैत ही अज्रे रिसालत है रूहे दीन मवद्दते अहले बैत है। मवद्दते अहलेबैत कामयाबी की गारन्टी है। शिया-सुन्नी एकता की मिसाल अन्जुमन सदाए हुसैन के सुन्नी समुदाय के राईन बिरादरी के साहबे बयाज आशिके अहलेबैते रसूल की तीजे की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना इब्ने अब्बास ने कही। मौलाना ने ये भी कहा कि सच्चे शीया बनना चाहते हो तो हारूने मक्की जैसा किरदार बनाओ। अपने दुश्मन को माफ करने में देर न लगाओ अगर वो दीन का दुश्मन न हो तो। किरदारे हुसैनी अपनाओ। मजलिस से पहले डा. रजा मौरान्वी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा पिला के पानी सरे राहे करबला हुर को, बुझे चराग को फिर रौशनी से जोड़ा गया। अजमल किन्तूरी ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा जिसको शहजादी ए कौनैन से बेजारी है, मेरी नजरों में यही दीन से गद्दारी है।

 

 

फातिमा जहरा का दरवाजा जलाने वालों, ये मोहम्मद के घराने से वफादारी है। हाजी सरवर अली कर्बलाई ने अपना बेहतरीन कलाम पेश करते हुए पढ़ा ये मत कहो उसे अब हल्का ए सियाह में है, नसीब ए हुर्र ए जरी नूर की पनाह में है। जला के खाक वो कर देगा जालिमों का वजूद, जो शोला दर्द का मजलूम की इक आह में है। इसके अलावा हैदर आब्दी व रजा मेहदी ने भी नजरानये अकीदत पेश किया। मजलिस का आगाज तिलावते कलामे इलाही से हैदर आब्दी ने किया। निजामत के फराएज शबी अहमद आब्दी ने अंजाम दिया। बानियाने मजलिस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

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