इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने दीन को बचाया है: मौलाना सय्यद राहिब हसन ज़ैदी

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लखनऊ: हर साल की तरह इस साल भी इमाम बारगाह ए मेहदी अमीनाबाद लखनऊ में अशरा ए मजालिस का सिलसिला शुरू है जिसको मौलाना सय्यद राहिब हसन ज़ैदी खिताब फरमा रहे हैं इस अशरा ए मजालिस का विषय दीन और दीनी मसाएल है।

 

मौलाना सय्यद राहिब हसन ज़ैदी ने आज छटी मजलिस को खिताब करते हुए कहा कि दीन के एहकाम पर हमको हर सूरत में अमल करना है दीन से दूरी इख्तियार करना अल्लाह से दूरी इख्तियार करने के जैसा है और इमाम मासूम फरमाते हैं कि दुनिया आखिरत की खेती है, दुनिया में हम जो आमाल अंजाम दे रहे हैं उसका अज्र व सवाब हमको दुनिया में भी मिलेगा और आखिरत में भी मिलेगा मिसाल के तौर पर हम कोई फसल लगाए तो पहले बीज लगाते हैं उसके बाद फसल तय्यार होती है अगर बीज सेब का लगाएंगे तो फसल भी सेब की होगी बस इसी तरह हम दुनिया में जो आमाल अंजाम दे रहे हैं वह बीज हैं और जब हम अच्छे आमाल अंजाम देंगे तो हम अच्छी फसल काटेंगे और अगर खराब आमाल अंजाम देंगे तो हम खराब फसल काटेंगे।

 

मौलाना ने कहा कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने दीन को बचाया है अगर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कुरबानी पेश न करते तो आज दीन मिट नया दीन को न कोई जानता और न पहचानता न दीन के एहकाम पर कोई अमल करता लेकिन इमाम हुसैन अ०स० करबला गए और दीन की हिफाज़त की और दीन को बचाया और इमाम मासूम फरमाते हैं कि यह दुनिया तय्यारी है असल ज़िंदगी के लिए असल ज़िंदगी इंसान की यह दुनिया नहीं है बल्कि आखिरत है जहां इंसान हमेशा रहने वाला है लिहाज़ा दीन के एहकाम पर अमल करें ताकि हम जहां हमेशा रहने वाले हैं वहां अच्छा मकाम हासिल कर सकें और आराम से अपनी ज़िंदगी बसर कर सकें।

 

स्पष्ट रहे इस अशरा ए मजालिस के बाद अज़ाखाने वसीम कैसर मुत्तसिल तनज़ीमुल मकातिब गोलागंज में अशरा ए मजालिस का सिलसिला शुरू है जिसको मौलाना सय्यद राहिब हसन ज़ैदी खिताब कर रहे हैं जिसका विषय कुरआन की अहमियत और फज़ीलत है।

जिसके फौरन बाद इमामबाड़ा वाजिद अली में मजलिस आयोजित हुई जिसको मौलाना सय्यद राहिब हसन ज़ैदी ने खिताब किया बाद मजलिस जनाबे अली असगर अ०स० का झूला उठाया गया जिसमे अंजुमने सज्जादिया मुफ्तिगंज लखनऊ ने नाैहा ख्वानी व सीनाज़नी की।

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