लाॅकडाउन के बीच लखनऊ पर अचानक टिड्डी दल ने किया हमला, मची अफरा-तफरी

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राजधानी के आसमान में दिखे टिड्डी दल के झुंड, किसानों व अधिकारियों में मची हलचल

लखनऊ : कोरोना संकट के बीच अचानक हुए टिड्डियों के हमले से लखनऊ में रविवार को हड़कंच मच गया। देखते-देखते ही राजधानी के आसमान में करोड़ों टिड्डियों ने डेरा डाल दिया। शहर के ग्रामीण इलाकों से लेकर शहर के वीआईपी काॅलोनियों तक टिड्डियों के झुंड के झुंड आसमान पर मंडराने लगे। लाॅकडाउन के सन्नाटे में थालियों और ध्वनि विस्तारक यंत्र गूंजने लगे। कृषि विभाग सहित अफसरों की टीमें दौड. भाग करने लगीं और लोगों ने अपने-अपने घरों की छतों पर खड़े होकर इस आसमानी जीव को भगाने के प्रयास में जुट गए। इन सब के बीच लखनऊ के किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं। फिलहाल जिला प्रशासन व विशेषेज्ञों की टीम टिड्डियों को मारने और भगाने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं।

रविवार की सुबह लाॅकडाउन के चलते पूरे शहर में सन्नाटा पसरा हुआ था। कोरोना से मुकाबले के लिए अधिकतर लोग अपने-अपने घरों में ही दुबके हुए हैं। लेकिन इसी बीच अचानक काकोरी और दुबग्गा इलाके में टिड्डी दल ने प्रवेश किया। काकोरी के ग्राम पंचायत चैधरी खेड़ा, भवानी खेड़ा, तेजकिशन खेड़ा, गोहरामऊ, कौड़ियाखेड़ा, शिवरी, कटिंघरा, बड़ागांव सहित आस-पास के इलाकों में टिड्डीयों ने किसानों की फसलों पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से किसानों के होश उड. गए। प्रशासन के साथ मिलकर जब किसान टिड्डी दल को भगाते, तब तक हजारों बीघा फसल नष्ट हो चुकी थी। टिड्डियों के झुंड देख कर आम जनता में भी दहशत बैठ गयी। लोगों ने घरों की खिड.कियां-दरवाजे बंद कर टिड्डी दल को भगाने का प्रयास किया। इसके बाद कुछ घण्टों में लखनऊ शहर के पूरे आसामान में टिड्यिों के झुंड देखे गए। कोकोरी, दुबग्गा, बुद्धेश्वर, आलमबाग, चैक, नक्खास, इंदिरानगर, मडि.यांव, मुंशीपुलिया, हजरतगंज के आस-पास टिड्डी दल के झुंड आसमान में मंडरा रहे हैं।

बता दें कि पिछले कई दिनों से लखनऊ के आसपास के जनपदों में टिड्डी दल के झंुड देखे जा रहे थे। हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, कानपुर, मैनपुरी, एटा, बहराइच और श्रावस्ती समेत प्रदेश के विभिन्न जिले टिड्डी दल से आक्रांत रहे। रविवार की भोर होने के साथ आगे बढ़ा टिड्डी दल लखनऊ पहुंचने पर छोटे-छोटे झुंड में बंटा हुआ नजर आया। जिससे इनसे निपटने में परेशानी हो रही है। परेशान किसान थालियां, घंटा व ड्रम बजाकर टिड्डियों को भगाने का प्रयास कर रहें हैं। कृषि रक्षा से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक टिड्डी दल को लेकर पहले से अलर्ट जारी है। सभी बीटीएम, एटीएम व अन्य अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए थे।

कोरोना संकट के बीच टिड्डी दल नई मुसीबत

जानकारी का कहना है कि मानसून में रेगिस्तानी टिड्डियां अधिक सक्रिय हो गई हैं। इससे समस्या बढ़ सकती है। कुदरत के कहर ने इस बार इंसानों का जीना मुश्किल कर दिया है। पिछले कई महीनों से कोरोना महामारी से पीडि.त किसान व मजदूरों के लिए टिड्डी दल नई चुनौती है। करोड़ों की संख्या में धावा बोलने वाली टिड्डियों देखते ही देखते बीघों फसल चट कर जाती हैं। टिड्डियों के हमले से किसान आतंकित हैं। किसानों ने कृषि विभाग पर लापरवाही बरतने का भी आरोप लगाया है।

डीएम अभिषेक प्रकाश ने पहले ही किया था सतर्क

जून के अंतिम सप्ताह में उन्नाव जिले में फसलों व पेड़-पौधों को भारी नुकसान पहुंचाने के बाद टिड्डी दल जब लखनऊ की ओर बढ़ा था। तभी लखनऊ के जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने गांवों में निगरानी के निर्देश दिए थे। टिड्डी दल दिखने पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी और जिला कृषि अधिकारी के पास सूचना दर्ज कराने को कहा गया था। डीएम ने गांवों में बैठक कर किसानों को जागरूक करने को कहा था। प्रधान और ग्राम सचिव के अलावा जिला कृषि रक्षा अधिकारी व जिला कृषि अधिकारी के नंबर जारी करने के साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर टिड्डी दल से जुड़ी सूचना अपडेट करते रहने को कहा गया था।

डीएम ने गांव-गांव जागरूकता बैठक के दिए थे निर्देश

टिड्डियों का प्रकोप महामारी का रूप न ले ले, इसके लिए डीएम ने टिड्डियों से फसलों की सुरक्षा के लिए पूरी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए थे। ग्राम प्रधानों, पंचायत सचिवों के साथ कृषि विभाग के तकनीकी स्टाफ को सक्रिय कर उन्हें निर्देश दिए गए कि वह गांव-गांव जागरूकता बैठक करें। दवा छिड़काव की भी जानकारी किसानों को दी जाए। वहीं, किसानों का कहना है कि ये बातें सिर्फ कागजी थी। हां, डीएम के निर्देश पर मोहनलालगंज एसडीएम पल्लवी मिश्रा ने तब उन्नाव जिले की सीमा पर पड़ने वाले गांव बिलैया खेड़ा, मीरानपुर, इमिलिया खेड़ा मीनापुर, बरवलिया समेत कई गांवों में जाकर लोगों से मिलीं थीं व उन्हें टिड्डी दल के प्रति सचेत किया था।

टिड्डियों से बचाव के लिए करें ये उपाय

1- टीन के डिब्बों, थालियों, ढोल नगाड़े और लाउडस्पीकर बजाएं। इससे टिड्डी दल आक्रमण नही कर पाएगा।

2- बुलई मिट्टी प्रजनन का अनुकूल होती है। इसलिए ऐसी मिट्टी के क्षेत्र में जुताई कराकर पानी भरवा दें।

3- टिड्डी दल के नियंत्रण के लिए मैलाथियान 96 प्रतिशत यूएलवी का छिड़काव अत्यंत प्रभावी होता है।

4- ब्लॉक स्तर पर फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तैयार रहें। ताकि कीटनाशक रसायनों का छिड़काव करते हुए नुकसान से बचा जा सके।

5- टिड्डी दल प्रति घंटा 2 किलोमीटर के हिसाब से मूवमेंट करता है और ऐसे स्थान जहां हरियाली है, वहां पहुंच रहा है। सभी खंड विकास अधिकारी सतर्क रहें और ऐसे गांवों की जानकारी दें, जहां दल पहुंचा हो

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