सरकारी जांच में निगेटिव, निजी लैब में रिपोर्ट आई पॉजिटिव, मचा हड़कंप

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निजी लैब पर जांच सही से ना करने का आरोप जांच की रसीद नहीं दी पैसे वसूलने के लिए बना दिया संक्रमित

लखनऊ : गोमतीनगर विस्तार में रहने वाले एक व्यक्ति के सरकारी अस्पताल से कोरोना की जांच कराने और रिपोर्ट निगेटिव आने पर राहत की सांस ली। ठीक इसी बाच 17 घंटे पहले उसने एक निजी लैब से कोरोना की जांच कराई थी। जिसमे उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने से पूरी सोसायटी में हड़कंप मच गया। पीड़ित का आरोप है कि निजी लैब ने जांच सही नहीं की है। जिससे कई लोगों ने अपनी जांच कराने अस्पताल तरफ दौड़ पड़े। परिवेट लैब ने जांच के लिए पच्चीस सौर रूपये वसूल लिया और रसीद भी नहीं दी।

गोमतीनगर विस्तार के सरस्वती अपार्टमेंट में रहने वाले एक व्यक्ति ने मौसम के कारण स्वास्थ्य खराब होने पर जांच कराना उचित समझा। उन्होंने बताया कि इंटरनेट से सर्च किया तो गुड़गांव में स्थित एसआरएल लैब से सम्पर्क किया। इसकी एक शाखा गोमतीनगर के विपुलखंड में भी खुली हुई है। एसआरएल गुड़गांव से सम्पर्क करने पर बीते 25 जुलाई को लखनऊ शाखा से आशीष नाम का व्यक्ति उनके घर सैम्पल लेने उनके फ़्लैट पर पहुंच गया। जांच के लिए उनसे 2500 की राशि ली गई। जिसकी कोई रसीद नहीं दी गई। सोमवार जब उनकी रिपोर्ट आई तो वह सकते में आ गए। घर वाले भी दहशत में थे। सोसयटी में कोरोना पॉजिटिव होने की बात आग की तरह फ़ैल गई। उन्होंने बताया कि उनकी कॉलोनी में रहने वाले पीजीआई के कुछ सीनियर डाक्टर के सुझाव देने पर उन्होंने तुरंत जांच पीजीआई से कराई तो रिपोर्ट नगेटिव आई। इसके लिए उन्हें मात्र 1750 ही चुकाने पड़े थे।

कई प्राइवेट संस्थानों की शिकायत पर नहीं हो रही कार्रवाई

कोरोना जांच उनकी रिपोर्ट को लेकर कई प्राइवेट अस्पताल और डायगोनस्टिक सेंटर की शिकायत हुई है। ऊंची पहुंच के आगे अधिकारी भी ठोस कदम उठाने से हिचक रहे हैं। हाल ही में चिनहट के चंदन अस्पताल में गड़बड़ी और लापरवाही की सुचना मिली थी। वहीं दुबग्गा स्थित चरक अस्पताल की भी कई बार शिकायत कई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मामला तूल पकड़ने पर कार्रवाई करते हुए स्वास्थ्य विभाग कई टीम ने चरक अस्पताल को सील कर दिया।

मोटा पैसा वसूलते हैं अस्पताल और डायगोनस्टिक सेंटर

कोरोना काल में सरकारी अस्पताल में बेड फूल हो चुके हैं। लोग इलाज के लिए प्राइवेट संस्थानों की ओर दौड़ रहे हैं। उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर प्राइवेट संस्थान लगातार मनमानी करने में जुटे हैं। वह लोगों से टेस्ट के नाम से मोटी राशि वसूलते हैं। इलाज कराने के नाम पर अस्पताल में भर्ती करा लेते हैं।

डॉ राजेंद्र प्रसाद सीएमओ लखनऊ का कहना है कि ऐसे अस्पतालों और डायगोनस्टिक सेंटर कई शिकायत मिलने पर हमारी टीम द्वारा सख्त कार्रवाई कई जा रही है। मामला संज्ञान में आया है, जांच करके ठोस कार्रवाई कई जाएगी।

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