बिहार के थानेदार को लगा अपना रुतबा सर्वोपरि रखने व नायक बनने का चस्का

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उन्नाव : &https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8220; दान का चर्चा घर घर पहुंचे&https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8221; &https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8220;लूट की दौलत छुपी रहे&https://www.youtube.com/channel/UCcj8JxdUrXPVdAxW-blFheA8221;इस गीत के मुखडे से इतर नही है बिहार थाने के थानेदार का किरदार ! जी हॉ !
आम जनता के लिए थोड़ी सी मेहनत और बड़ा सम्मान पाने की महत्वाकांक्षा! सेवा सम्मान व समर्पण की सौगंध लेकर पुलिस सेवा में शामिल हुए। बिहार थाने के एसओ संतोष सिंह को अपना रुतबा सर्वोपरि रखने व खुद को नायक की तरह प्रस्तुत करने का चस्का लगा है। शायद इसीलिए वे जो कुछ अच्छा पुलिस सेवा के दायरे में करते हैं। उसकी मुनादी जरूर करा देते हैं, और जो बुरा करते हैं उसे अच्छा बना कर एसपी को बताने के लिए हर पल तैयार रहते हैं, एसओ के बारे में जिले भर में चर्चा है, वे विभाग की छवि से ज्यादा अपनी ऊंची करने में लगे रहते हैं

आम आदमी की शिकायत इनके लिए कोई मायने नहीं रखती। यह आपने थाना क्षेत्र में अपना कानून चलाते हैं। बात करते हैं कि तहजीब और तमीज तो जैसे एसओ साहब ने कहीं सीखी ही नहीं। इसके पहले इसी रवैया के चलते इसका स्थानांतरण एक जगह से दूसरी पर हुआ करता है। अपनी ऊंची करने के चक्कर में थाने में आने वाले हर पीड़ित को वह अपनी तथाकथित योग्यता और पहुंच के चर्चे जरूर सुनाते हैं। बिहार थाना अध्यक्ष संतोष सिंह अपने कार्य और व्यवहार को लेकर इन दिनों चर्चा में है। हालांकि चर्चा में तो आमद के साथ ही उस समय हो गए थे। जब उन्हें थाना असोहा से बिहार किया गया था

अब जब इन्हें दोबारा बिहार थाने का चार्ज मिला तो वो फिर अपने बेअंदाज स्वभाव और बेलगाम कार्यशैली पर उतर आए, थाने पर आने वाले पीड़ितों से बेअदबी के लिए तो यह पूरे जिले में विख्यात हो चुके हैं। जो भी पीड़ित या जनता उनसे फरियाद लेकर मिलने आता है। वह उसे न केवल अपने रुतबे के किस्से सुनाते हैं बल्कि यह भी बताने की कोशिश करते हैं, कि थाना ही नहीं जिले का पुलिस विभाग भी इन की सलाह मशविरा पर ही चल रहा है। यही नहीं इनका मतलब हर फरियादी और मीडिया कर्मी से कहना है कि हमारे कप्तान साहब के तालुकात घर जैसे हैं, इसलिए मुझे शिकायत का डर नहीं है। पुलिस अधीक्षक से घर जैसे संबंध बताने वाले बिहार थाना अध्यक्ष जनता पर रौब गांठते हैं। एसओ बिहार की इस तरह की बातें सुनकर पहले तो लोग सहजता से विश्वास नहीं करते लेकिन जब सही मामले को भी एसओ गलत ठहराते हैं और जिले के अधिकारियों भी उनका पक्ष लेते हैं तो एसओ के रुतबे पर यकीन करना मजबूरी बन जाता है थानाध्यक्ष संतोष सिंह हर अपराधी की वारदात को कानून के नहीं अपने चश्मे से देखते हैं। फिलहाल तो अपनी मजबूत पकड़ के लिए और उन्नाव पुलिस विभाग में चर्चाओं के चरम पर हैं।वहीं अगर उनके कार्यकाल की चार पांच घटनाओं की निष्पक्षता से जांच हो जाए तो उन्हें लाइन जाने में कोई रोक नहीं पाएगा अब सवाल यह है कि आखिर निष्पक्ष जांच करेगा कौन?

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