पूरे देश में एक समान हो कोरोना टेस्ट की कीमत: सुप्रीम कोर्ट

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कहा, शवों की सही तरीके से देखभाल सुनिश्चित करें राज्य

लखनऊ : सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पूरे देश में कोरोना टेस्ट और इलाज की कीमत एक समान होनी चाहिए। कहीं पर कोरोना टेस्ट के लिए मरीजों को 2200 रुपए चुकाने पड़ते हैं तो कहीं पर 4500। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को कोरोना टेस्ट, इलाज और शवों के रख-रखाव को लेकर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए एक निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस भूषण ने कहा, केन्द्र सरकार कोविड-19 के लिए एक कीमत तय करे। जो सभी राज्यों में समान हो। हालांकि राज्य चाहें तो अपने यहां कीमत कम भी कर सकते हैं।

इसके साथ कोर्ट ने कोरोना से होने वाली मौतों में शवों की उचित देख-भाल का भी सख्त निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा, राज्य कोरोना मरीजों और महामारी से मरने वाले लोगों के शवों की उचित देख-भाल करें। किसी भी शव के साथ दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो वह सभी अस्पतालों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का आदेश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को सलाह दी है कि वह विशेषज्ञों की टीम बनाएं। जो अस्पतालों का दौरा व्यवस्थाओं का जायजा ले सके। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कि खामियों को उजागर करने वाले हेल्थस्टाफ को परेशान न किया जाए। बहस के दौरान दिल्ली सरकार के महाधिवक्ता से कोर्ट ने पूछा, अंसल बंधुओं की ओर से ट्रॉमा सेंटर बनाने के लिए 5 साल पहले मिले 60 करोड़ रुपए का क्या हुआ?

दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि एलएनजेपी अस्पताल में खामियों को लेकर वीडियो वायरल करने वाले डाॅक्टर के खिलाफ केस वापस ले लिया गया है। कोर्ट ने महाराष्ट्र में मरीज और रिश्तेदार को कोविड-19 की पॉजिटिव टेस्ट रिपोर्ट न देने के आदेश से असहमति जाहिर की। कहा कि राज्य इस पर फिर से विचार करे। बता दें 12 जून को शीर्ष अदालत ने कोरोना के इलाज और शवों के साथ हो रही अमानवीयता का स्वतः संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू की थी। तब कोर्ट ने केन्द्र सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब करते हुए अगली सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख तय की थी।

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