सुरक्षा की दृष्टि से सार्वजनिक स्थल पर हिजाब और बुर्खा हो प्रतिबन्धित

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हिन्दू महासभा ने हिजाब मामले में हाईकोर्ट के निर्णय का किया स्वागत

लखनऊ : अखिल भारत हिन्दू महासभा, उत्तर प्रदेश ने आज कर्नाटक के स्कूल कालेजों में हिजाब पहनने के मामले में हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत करते हुये कहा है कि सुरक्षा के दृष्टिगत सार्वजनिक स्थलों पर हिजाब के साथ बुर्खा पहने पर तत्काल रोक लगायी जानी चाहिए। हिन्दू महासभा के प्रदेष अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने कहाकि हाईकोर्ट के निर्णय से साफ हो गया है कि हिजाब धर्म का हिस्सा नहीं है

तो देश और राज्यों की सरकारों को चाहिए कि वह सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये हिजाब का इस्तेमाल सार्वजनिक स्थलों पर रोका जाना चाहिए। श्री त्रिवेदी ने कहा कि हिजाब और बुर्खा की आड़ में देषभर के रिटेल शोरूम में चोरी के कई मामले सामने आ चुके है। मालूम हो कि कर्नाटक में लगभग ढाई माह पूर्व स्कूल कालेजों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद हो गया था

और न्यायालय में पहुंच में पहुंच गया था, जिस पर आज कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी, जस्टिस कृष्ण एस. दीक्षित और जस्टिस खाजी जयबुन्नेसा मोहियुद्दीन की तीन मेंबर वाली बेंच ने राज्य सरकार के 5 फरवरी को दिए गए आदेश को भी निरस्त करने से इनकार कर दिया, जिसमें स्कूल यूनिफॉर्म को जरूरी बताया गया था।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने हिजाब के समर्थन में मुस्लिम लड़कियों समेत दूसरे लोगों की तरफ से लगाई गईं सभी 8 याचिकाएं खारिज कर दीं। हिन्दू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष ऋषि त्रिवेदी ने कहा कि धर्म की आड़ में देश को अब बरगलाया नहीं जा सकता, यदि हिजाब और बुर्खा धर्म का हिस्सा होता तो दुनिया कई देशों में इस पर रोक नहीं होती।

मंगलवार को फैसला सुनाने से पहले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रितुराज अवस्थी ने कहा कि इस मामले में दो सवालों पर गौर करना अहम है। पहला क्या हिजाब पहनना आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक आजादी के अधिकार में आता है। दूसरा क्या स्कूल यूनिफॉर्म पहनने को कहना इस आजादी का हनन है। इसके बाद हाईकोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर बैन को सही ठहराया।

कर्नाटक में हिजाब पर बवाल शुरू होने के बाद मामला सेशन कोर्ट पहुंचा था। सेशन कोर्ट के बाद केस हाईकोर्ट में गया, जहां इसे बड़ी बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की अगुआई वाली तीन मेंबर की बेंच ने इस पर सुनवाई शुरू की। आखिरकार आज 15 मार्च को इस मामले पर फैसला सुनाया गया।

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