लखनऊ : स्मार्ट सिटी के तहत अमीरूदौला पुस्तकालय का होगा कायाकल्प

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अमीरूदौला पब्लिक लाइब्रेरी की बोर्ड बैठक सम्पन्न, मण्डलायुक्त ने दिए निर्देश

लखनऊ : गुमनामी में खो रही राजधानी कीे ऐतिहासिक व समृद्ध अमीरूदौला पब्लिक लाइब्रेरी को फिर से लोकप्रिय व जनउपयोगी बनाने की कवायद जोर-शोर से चल पड़ी है। सोमवार को मण्डलायुक्त मुकेश कुमार मेश्राम की अध्यक्षता में अमीरूदौला पब्लिक लाइब्रेरी की बोर्ड बैठक संपन्न हुई। जिसमें मण्डलायुक्त ने वित्तीय वर्ष 2019-20 के आय-व्यय सहित तमाम कार्यों की समीक्षा की। साथ ही इस पुस्तकालय को लोकप्रिय बनाने के लिए तमाम निर्देश दिए। मण्डलायुक्त ने कहा कि यह एक बहुत ऐतिहासिक व समृद्ध पुस्तकालय है। यहां लगभग एक लाख 65 हजार पुस्तकों का संग्रह व ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां मौजूद हैं। ज्ञान के इस भण्डार के समुचित उपयोग के लिए आधुनिक युवाओं को इससे रूबरू कराने की जरूरत है।

मण्डलायुक्त ने बताया कि स्मार्ट सिटी के तहत पुस्तकालय का जीर्णोद्वार व डिजिटालाइजेशन कराया जा रहा है। ताकि इस ऐतिहासिक धरोहर को संरक्षित किया जा सके। जरूरत के हिसाब से पुस्तकालय को री-डिजाइन कर एक स्मार्ट लाइब्रेरी के रूप में विकसित किया जाएगा। बच्चों, दिव्यांगों, वृद्धजनों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विधार्थियों के लिए वातानुकूलित हाल तैयार कराए जाएंगे। छोटे-छोटे कार्यक्रमों को आयोजित करने के लिए भी हाल, कैन्टीन व सामुदायिक शौचालय विकसित किए जाएंगे।

मण्डलायुक्त ने कहा कि पुस्तकालय को प्रासंगिक बनाने के लिए उन्हीं पुस्तकों का डिजिटाइजेशन कराया जाए, जो महत्वपूर्ण हों। अधिक से अधिक बच्चों, युवाओं व विद्धानों को पुस्तकालय से जोड.ने के लिए यहां विभिन्न गतिविधियां प्रारम्भ की जाए। स्कूलों के बच्चों को पुस्तकालय का निरीक्षण कराएं। उन्हें पढ़ने के लिये पुस्तके उपलब्ध कराएं। इससे बच्चों का पुस्तकों की तरफ रूझान बढ़ेगा। बच्चों के बीच छोटे-छोटे कम्पटीशन (जैसेः-निबन्ध, कविता लेखन, वाद विवाद, कहानी लेखन, शायरी इत्यादि) कराएं।

पुस्तकालय के लिए दान लेने का करें प्रयास

मण्डलायुक्त ने कहा कि केन्द्र, राज्य व अन्य संस्थाओं से पुस्तकालय के लिए दान प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए। यदि कोई व्यक्ति या संस्था पुस्तकालय में दान करती है तो उसे संरक्षक सदस्य बनाया जाए। उन लोगों के नाम बोर्ड पर अंकित किए जाएं। ऐसे लोगों को निःशुल्क पांच मेम्बरसिप कार्ड दिये जाएं। उन्हें पुस्तक के चयन व एलाटमेट में प्राथमिकता दी जाए।

लेखकों, साहित्यकारों संगठनों को पुस्तकालय से जोड़े।
मण्डलायुक्त ने कहा, लेखकों, साहित्यकारों संगठनों को पुस्तकालय से जोड़े। ऐसे लोग अपना योगदान व सुझाव प्रदान करें। पुस्तकालय का एक एडवाइजरी बोर्ड तैयार कराएं। जिसमें शहर के अच्छे इतिहासकार, साहित्यकार, संस्कृतिविद को रखा जाए। शहर के लोग यदि काव्य गोष्ठिया, साहित्य चर्चाएं किस्सा गोयी, पुस्तक वाचन करना चाहें तो उनकों पुस्तकालय में स्थान उपलब्ध कराया जाए।

यूपी के प्रसिद्ध व स्थापित साहित्यकारों की जयन्ती पर छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उसमें उन साहित्यकारों के बारे में जानकारी प्रदान की जाए। इसकी शुरूवात लखनऊ के प्रसिद्व साहित्यकारों से की जाए। पुस्तकालय में त्रैमासिक डिजिटल मैगजीन प्रकाशित करायी जाये। इसके लिये लाइब्रेरी विज्ञान के स्वयं सेवी विधार्थियों का सहयोग लिया जाए।

पुस्तकालय की डाक्यूमेन्ट्री तैयार होगी

मण्डलायुक्त ने कहा कि पुस्तकालय की डाक्यूमेन्ट्री तैयार कराई जाए। जिसमें पुस्तकालय का इतिहास, संग्रह, उपयोगिता उपलब्ध हो। डाक्यूमेन्ट्री वेबसाइट पर अपलोड की जाए। सोशल मीडिया में प्रचार-प्रसार के लिए फेसबुक व ट्वीटर एकाउन्ट बनाया जाएं। यदि कोई नयी या उपयोगी पुस्तक पुस्तकालय में आए या कोई कार्यक्रम आयोजित किया जाये तो आमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर अपलोड किया जाए। पुस्तकों के चयन के लिये एक समिति गठित की जायेगी जिससे उपयोगी पुस्तकों का ही चयन किया जायें।

बैठक के उपरांत मण्डलायुक्त ने पुस्तकालय का निरीक्षण किया। कहा कि पुस्तकालय में पड़ी अनुपयोगी सामग्री को एक समिति बनाकर उसका डिस्पोजल कराया जाये। बैठक में अपर नगर आयुक्त अमित कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट सुशील प्रताप सिंह, उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) विभा श्रीवास्तव, पुस्तकालयाध्यक्ष हरिशचन्द्र सहित सभी सम्बन्धित अधिकारी उपस्थित थें

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